Kuch Dil Ki Suni Jaye- Hindi Poetry on Ignored Desires

by | Dec 10, 2019 | INSPIRATIONAL, LIFE, SENTIMENTS | 0 comments

उपेक्षित इच्छाओं पर हिंदी कविता

कुछ दिल की सुनी जाये 

चलो रस्मों रिवाज़ों को लांघ कर
कुछ दिल की सुनी जाये
 कुछ मन की करी जाये 

एक लिस्ट बनाते हैं
 अधूरी कुछ आशाओं  की
उस लिस्ट की हर ख्वाहिश 
एक एक कर पूरी की जाये
 कुछ दिल की सुनी जाये 
कुछ मन की करी जाये 

कोई क्या सोचेगा 
कोई क्या कहेगा
इन बंदिशों से परे हो के
थोड़ी सांसें आज़ाद हवा में ली जाये
कुछ दिल की सुनी जाये 
कुछ मन की करी जाये 

बहुत रोका मैंने बहते मन की
 रफ्तारों को 
अब बहाव की ही दिशा में
 अपनी नाँव खींची जाये 
कुछ दिल की सुनी जाये 
कुछ मन की करी जाये 

मैं जानती हूँ सबके जीवन में 
कुछ अधूरा रह गया होगा
 कभी ज़रूरत तो कभी प्यार की 
खातिर अपनी इच्छा की
अवहेलना न की जाये 
कुछ दिल की सुनी जाये 
कुछ मन की करी जाये 

क्या पता किसी से 
एक बार मिलना रह गया हो 
किसी से कुछ कहना  रह गया हो 
मुद्दतों तरसा किये जिस मौके 
की तलाश  में 
उस इंतज़ार की मोहलत कुछ
 कम की जाये 
कुछ दिल की सुनी जाये
कुछ मन की करी जाये

दिया है जीवन एक
 ही उस खुदा ने
 कही आखिरी सांस 
पर कोई इच्छा दिल में
 ही न दबी रह जाये 
कुछ दिल की सुनी जाये
 कुछ मन की करी जाये 

चलो रस्मों रिवाज़ों को लांघ कर
कुछ दिल की सुनी जाये 
कुछ मन की करी जाये

अर्चना की रचना  “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”

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